नस्ल सुधार से पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ मजबूत आधार

अब तक 15 लाख 21 हजार से अधिक प्रजनन योग्य पशुओं में किया जा चुका है कृत्रिम गर्भाधान
भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पशुओं में नस्ल सुधार किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ संचालित किया जा रहा है। पशुओं के नस्ल सुधार का यह अभियान पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत आधार बना है।
अभियान के अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधान, बधियाकरण, गोशालाओं में नस्ल सुधार सहित पशुपालकों को सेक्सड सॉर्टेंड सीमन के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का मुख्य उद़देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना, कृत्रिम गर्भाधान और स्थानीय स्तर पर प्रत्येक ग्राम पंचायत के बेरोजगार युवा को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। इसके लिए प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देश्यीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) की व्यवस्था करना है।
कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष फोकस
प्रदेश सरकार द्वारा कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष फोकस किया जा रहा है। वर्तमान में 15.21 लाख पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। वहीं सॉर्टेड सेक्स सीमन के उपयोग को बढ़ावा देते हुए अब तक 1.65 लाख पशुओं में इसका सफल उपयोग किया गया है। कृत्रिम गर्भाधान की गुणवत्ता सुधारने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है। साथ ही जागरुकता के लिए राज्य, जिला और विकासखंड स्तर पर निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा कॉल सेंटर के माध्यम से प्रतिदिन किए गए कार्यों का टेलीफोनिक सत्यापन भी किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो रही है।
पंचायतों में ‘मैत्री’ कार्यकर्ता की व्यवस्था
पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराने एवं ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देश्यीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) का प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। अभी तक 12 हजार 988 से अधिक मैत्री प्रशिक्षित किए गए हैं।
गोशालाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर
अभियान के अंतर्गत प्रदेश की गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है। इसके लिए प्रजनन योग्य गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान एवं अनुपयोगी सांडों का बधियाकरण किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश की विभिन्न गोशालाओं में उपलब्ध 11 हजार 551 गोवंश में कृत्रिम गर्भाधान तथा 37 हजार 355 सांडों का बधियाकरण किया गया है।
कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता पुरस्कार योजना के माध्यम से किया जाएगा पुरस्कृत
विभाग द्वारा नस्ल सुधार कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों, मैत्री एवं अन्य कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए “कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता पुरस्कार योजना प्रारंभ की जाएगी। विकासखंड, जिला एवं राज्य स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
कॉल सेंटर के माध्यम से प्रतिदिन किया जा रहा सत्यापन
हिरण्यगर्भा अभियान अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का राज्य स्तर पर प्रतिदिन कॉल सेंटर के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है। प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के कार्य की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हुआ है। प्रदेश में सेक्सड सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान कराने की मांग बढ़ी है। साथ ही प्रदेश में दुग्ध संकलन में भी इजाफा हुआ है।